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बदलती जीवनशैली से घट रहा जबड़े का आकार, 32 दांतों की धारणा बदल रही

देहरादून: लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि हर व्यक्ति के मुंह में 32 दांत होते हैं, लेकिन अब विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जीवनशैली और जबड़े के आकार में कमी के कारण यह स्थिति तेजी से बदल रही है। कई लोगों में अक्ल दाढ़ (थर्ड मोलर) को निकलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती, जिससे वह मसूड़ों के भीतर ही फंस जाती है और उसे निकालने के लिए सर्जरी करनी पड़ती है।

एम्स ऋषिकेश के वरिष्ठ दंत सर्जन डॉ. प्रेम कुमार राठौड़ के अनुसार, बच्चों को बचपन से अधिकतर नरम भोजन दिए जाने के कारण उनके जबड़ों का पर्याप्त विकास नहीं हो पाता। इसके अलावा बचपन में मुंह के बल गिरने से जबड़े के ग्रोथ सेंटर (कोंडाइल) में चोट लग सकती है, जिससे जबड़े का विकास प्रभावित होता है। कुछ मामलों में चोट के बाद जमा हुआ खून हड्डी का रूप ले लेता है, जिससे जबड़े की सामान्य वृद्धि रुक जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जबड़े में जगह कम होने के कारण अक्ल दाढ़ पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाती। एम्स ऋषिकेश में प्रतिदिन लगभग 10 मरीजों की थर्ड मोलर सर्जरी की जाती है। ऐसे मामलों में व्यक्ति के मुंह में 32 की बजाय केवल 28 दांत ही रह जाते हैं। कुछ मामलों में यह समस्या आनुवंशिक कारणों से भी हो सकती है।

वर्ष 2025 में महाराष्ट्र में किए गए एक शोध के अनुसार, लगभग 60 प्रतिशत लोगों में जबड़े का आकार पहले की तुलना में छोटा पाया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों और शहरों में भी देखने को मिल रही है।

दून मेडिकल कॉलेज की दंत रोग विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. योगेश्वरी कृष्णन के अनुसार, अस्वास्थ्यकर खानपान के कारण बच्चों के दूध के दांत समय से पहले खराब होकर गिर जाते हैं। इसके बाद आसपास के दांत खाली स्थान की ओर खिसकने लगते हैं। जब स्थायी दांत निकलते हैं, तो उन्हें पर्याप्त जगह नहीं मिलती और वे टेढ़े-मेढ़े या गलत दिशा में निकल आते हैं।

विशेषज्ञों की सलाह:

  • बच्चों को बचपन से अच्छी तरह चबाकर खाने की आदत डालें।
  • मुंह या जबड़े पर लगी चोट को नजरअंदाज न करें।
  • पौष्टिक और संतुलित आहार दें ताकि जबड़े और दांतों का सही विकास हो सके।
  • दूध के दांतों की समय पर देखभाल और नियमित दंत जांच कराएं, ताकि स्थायी दांत सही स्थान पर निकल सकें।

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