सितंबर में 131 गांव और तीन कस्बों में होगी जनगणना, पहली बार पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया

देहरादून। देशभर में जनगणना की अधिसूचना जारी होने के बाद उत्तराखंड में तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस होगी। हालांकि प्रदेश में मुख्य जनगणना फरवरी 2027 में प्रस्तावित है, लेकिन ऊंचाई वाले 131 गांवों और तीन कस्बों—बदरीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री—में यह कार्य सितंबर 2026 में ही कराया जाएगा।
उत्तराखंड की जनगणना निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि जनगणना दो चरणों में होगी। पहला चरण मकान सूचीकरण (25 अप्रैल से 24 मई प्रस्तावित) और दूसरा चरण जनगणना का होगा। राज्य को करीब 30 हजार गणना क्षेत्रों में बांटा गया है। प्रत्येक क्षेत्र में एक प्रगणक तैनात होगा, जबकि छह प्रगणकों पर एक सुपरवाइजर नियुक्त किया जाएगा।
सीमाएं सील, तबादलों पर रोक
अधिसूचना जारी होने के साथ ही प्रदेश की प्रशासनिक और भौगोलिक सीमाएं सील कर दी गई हैं। 31 दिसंबर 2025 तक जो गांव, वार्ड या जिला जिस सीमा में था, वही स्थिति मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगी। जनगणना अवधि में अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादलों से बचने का भी अनुरोध किया गया है।
2011 से क्या होगा अलग?
इस बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित होगी। प्रगणकों को ऐप के माध्यम से डेटा संग्रह करना होगा और प्रशिक्षण भी ऑनलाइन मॉड्यूल के जरिए दिया जाएगा। खास बात यह है कि आम नागरिकों को स्वयं गणना (Self Enumeration) की सुविधा भी मिलेगी। पोर्टल पर मोबाइल नंबर से पंजीकरण कर लोग स्वयं अपनी जानकारी भर सकेंगे। बाद में प्रगणक घर आकर दिए गए विवरण का सत्यापन करेगा।
दुर्गम क्षेत्रों में कैसे पहुंचेगी टीम?
प्रदेश के हिमाच्छादित जिलों—रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, चमोली और उत्तरकाशी—के दुर्गम गांवों में स्थानीय शिक्षकों को ही प्रगणक बनाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार विशेष व्यवस्थाएं भी कर सकती है।
घोस्ट विलेज की भी होगी गणना
2011 की जनगणना के अनुसार उत्तराखंड में 16,793 राजस्व ग्राम थे, जिनमें 1,048 गैर-आबाद थे। फरवरी 2027 के दौरान हर गांव तक टीम पहुंचेगी। यदि गांव में कोई निवासी नहीं मिलेगा, तब भी उसे गैर-आबाद के रूप में दर्ज किया जाएगा।
डिजिटल व्यवस्था और स्वयं गणना की सुविधा के साथ यह जनगणना राज्य के लिए एक नई शुरुआत मानी जा रही है।



