उत्तराखंड में राज्यसभा सीट को लेकर भाजपा में मंथन, गढ़वाल-कुमाऊं संतुलन पर नजर

देहरादून। उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी में संभावित प्रत्याशियों को लेकर मंथन तेज हो गया है। शुक्रवार को होने वाली भाजपा कोर कमेटी की बैठक में संभावित दावेदारों के नामों पर चर्चा कर तीन नामों का पैनल तैयार किए जाने की संभावना है। इसके बाद प्रत्याशी को लेकर तस्वीर कुछ हद तक साफ होने की उम्मीद है।
राज्यसभा सीट के लिए सबसे अहम चर्चा गढ़वाल और कुमाऊं क्षेत्र के प्रतिनिधित्व को लेकर है। भाजपा के सामने यह सवाल भी है कि इस बार राज्यसभा के लिए कुमाऊं क्षेत्र को प्रतिनिधित्व दिया जाए या गढ़वाल से ही किसी नेता को आगे किया जाए।
कुमाऊं को प्रतिनिधित्व देने की चर्चा
उत्तराखंड से कुमाऊं क्षेत्र के अंतिम राज्यसभा सांसद भगत सिंह कोश्यारी रहे हैं, जिनका कार्यकाल 2008 से 2014 तक रहा था। इसके बाद कुमाऊं क्षेत्र से किसी नेता को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व नहीं मिला।
वर्तमान में भाजपा के तीनों राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, डॉ. कल्पना सैनी और नरेश बंसल गढ़वाल क्षेत्र से आते हैं। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए क्षेत्रीय संतुलन को भी पार्टी के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू माना जा रहा है।
प्रेमचंद अग्रवाल का नाम भी चर्चा में
संभावित दावेदारों में पूर्व मंत्री और ऋषिकेश विधायक प्रेमचंद अग्रवाल का नाम भी चर्चा में है। उन्हें वैश्य समाज के प्रतिनिधि के तौर पर देखा जा रहा है। बृहस्पतिवार को प्रेमचंद अग्रवाल ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की थी, जिसके बाद उनके नाम को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हुईं।
नरेश बंसल का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के मद्देनजर वैश्य समाज को प्रतिनिधित्व दिए जाने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व की ओर से किया जाना है।
कोर कमेटी की बैठक पर नजर
भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में संभावित नामों पर विचार के बाद तीन नामों का पैनल तैयार किए जाने की संभावना है। इसके बाद पैनल को केंद्रीय नेतृत्व के समक्ष रखा जा सकता है।
राज्यसभा प्रत्याशी के चयन में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, सामाजिक समीकरण और आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखे जाने की चर्चाओं के बीच अब सभी की नजर कोर कमेटी की बैठक पर है। पार्टी के अंतिम निर्णय के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि राज्यसभा सीट के लिए किस क्षेत्र और किस नेता को मौका मिलता है।



