उत्तराखण्ड समाचार

25 नवंबर तक समाधान न मिला तो आंदोलनकारियों का फिर आमरण अनशन का अल्टीमेटम

चौखुटिया (अल्मोड़ा)। चौखुटिया क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण को लेकर चल रहा ऑपरेशन स्वास्थ्य आंदोलन रविवार को अपने 53वें दिन भी उसी दृढ़ता और संकल्प के साथ जारी रहा, जिसके साथ इसकी शुरुआत हुई थी। लगातार आमरण अनशन, धरना और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के बावजूद अब तक ठोस निर्णय न होने से स्थानीय जनता में गहरी नाराज़गी पनप चुकी है। इसी बीच रविवार को क्षेत्रीय विधायक मदन सिंह बिष्ट आंदोलन स्थल पर पहुंचे और अनशनकारियों की स्थिति का जायजा लिया। उनकी मौजूदगी से लोगों ने अपनी पीड़ा एक बार फिर सामने रखी और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग दोहराई।

विधायक ने अनशनकारियों से उनकी स्वास्थ्य स्थिति, आंदोलन के दौरान आ रही समस्याओं और अपेक्षित समाधान के बारे में विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने आश्वासन दिया कि आंदोलन से जुड़ी मांगें लगातार प्रशासन और शासन तक पहुंचाई जा रही हैं तथा इस मुद्दे को विधानसभा में भी उठाया गया है। उनके अनुसार, सरकार स्तर पर समाधान की दिशा में प्रयास जारी हैं, लेकिन आंदोलनकारियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि वे अब आश्वासन से आगे ठोस कार्यवाही चाहते हैं। उनका कहना है कि 53 दिन से शांतिपूर्ण आंदोलन करने के बावजूद आज तक कोई ठोस निर्णय न आना निराशाजनक है और इससे स्थानीय जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा है।

धरनास्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, महिला समूह, युवा, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बुज़ुर्ग मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में उपजिला चिकित्सालय को पूरी तरह सुदृढ़ करने, पर्याप्त डॉक्टरों की स्थायी नियुक्ति, विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती, आधुनिक चिकित्सकीय उपकरण उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाने की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना था कि चौखुटिया जैसे विशाल क्षेत्र में आज भी चिकित्सा सुविधाओं की कमी आम जनता के जीवन से सीधा जुड़ा प्रश्न है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

दूसरी ओर, आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि 25 नवंबर तक उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन फिर आमरण अनशन की ओर बढ़ेगा और इस बार विरोध और भी उग्र होगा। अनशन के 53वें दिन केवलानंद पांडे 12 दिन, सुंदर सिंह नेगी 10 दिन और 82 वर्षीय बचे सिंह कठायत लगातार दूसरे दिन क्रमिक अनशन पर बैठे रहे। बढ़ती उम्र के बावजूद उनका संघर्ष आंदोलन की गंभीरता और जनता की मजबूरी को दर्शाता है। आंदोलनकारियों ने साफ कहा कि सरकार की उदासीनता अब असहनीय होती जा रही है और यदि जल्द निर्णय नहीं लिया गया, तो इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन पर होगी।

स्थानीय जनता की मांगों और आंदोलन की दृढ़ता को देखते हुए यह मुद्दा अब क्षेत्र के लिए केवल स्वास्थ्य से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि जन-अधिकारों की लड़ाई बन चुका है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट घोषणा की है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, ऑपरेशन स्वास्थ्य आंदोलन जारी रहेगा और संघर्ष अंतिम परिणाम तक आगे बढ़ता रहेगा।

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